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धरती के विषवृक्ष पाकिस्तान की जमात-ए-इस्लामी


Jamat-E-Islami Pakistan Talibani Plans of Islam

आज समूची दुनिया पाकिस्तान और उसकी पैदाइश “तालिबान” से आशंकित है, कि पता नहीं ये “ज्यादा समझदार” लोग कब, क्या कर बैठें। लेकिन इनकी यह मानसिकता कैसे बनी और इसके पीछे क्या सोच है इसका आभास इस इंटरव्यू से लगाया जा सकता है। यह इंटरव्यू दस वर्ष पहले अर्थात 1999 में लिया गया है। पंजगार (अफ़गानिस्तान) से प्रकाशित होने वाली “जम्हूरिया-इस्लामिया” नामक बलूची मासिक पत्रिका के लिये पत्रकार जलील आमिर द्वारा मौलाना नवाबज़ादा नबीउल्लाह खान जो कि पाकिस्तान की मुख्य इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख मौलाना काज़ी अहमद के दायें हाथ हैं, का इंटरव्यू लिया गया है, जिसमें मौलाना साहब ने “तालिबान” की सोच को स्पष्ट किया है। यह इंटरव्यू दस साल पहले (फ़रवरी 1999) का है, लेकिन इसमें जो “महान विचार” मौलाना साहब ने छोटे-छोटे बीजों के रूप में प्रकट किये हैं, वे इतने वर्षों में एक “जहरीले पेड़” का रूप ले चुके हैं। इस इंटरव्यू में प्रस्तुत मौलाना साहब के विचारों से यह भी ज्ञात होता है कि किस तरह से ये लोग धर्म का नाम लेकर युवाओं और बच्चों का ब्रेन-वॉश करते रहे हैं और आज तालिबान यानी छात्र (ऐसे छात्र ??) पूरी मानवता के लिये खतरा बन गये हैं। ऊपर से तुर्रा यह, कि ये मौलाना साहब इन सभी विचारों पर कुरआन के स्तर पर किसी से भी बहस करने को तैयार हैं… (है कोई कुरआन का जानकार जो इन साहब से बहस कर सके?)… इस इंटरव्यू में ज़ाहिर किये गये विचारों को पढ़कर कभी आप हँसेंगे, कभी आप माथा पीटेंगे, कभी गुस्सा होंगे, लेकिन कुल मिलाकर है बड़ा ही मजेदार इंटरव्यू। प्रस्तुत हैं जमात-ए-इस्लामी के मौलाना साहब के इंटरव्यू का हिन्दी अनुवाद…

महिलाओं और पुरुषों की बराबरी की बात करना मूर्खता है

(पत्रकार ज़लील आमिर) प्रश्न – मौलाना साहब, पाकिस्तान में आजकल महिलाओं का सवाल बहुत महत्वपूर्ण हो गया है, तालिबान जैसे संगठन महिलाओं की आज़ादी के खिलाफ़ हैं, जबकि कुछ प्रगतिशील मुस्लिम विद्वानों ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा दिया है। इस सम्बन्ध में आपका क्या नज़रिया है?
(मौलाना नबीउल्लाह) उत्तर – मैं पहले भी कह चुका हूँ, महिलाओं के बारे में पैगम्बर मोहम्मद (PBUH) और जमात के विचार एकदम समान हैं और इसके अनुसार “महिलाओं और पुरुषों की बराबरी की बात करना नितांत मूर्खता है”, जो काम मर्द कर सकता है, महिला नहीं कर सकती। महिलायें पुरुषों के मुकाबले शारीरिक और मानसिक रूप से कमजोर होती हैं। पुरुष को हमेशा महिलाओं की “देखरेख” करनी चाहिये। महिलाओं को घर में ही रहना चाहिये, उन्हें शिक्षा तो दी जा सकती है, लेकिन वह शिक्षा पुरुषों से मुकाबले के लिये नहीं होना चाहिये। काज़ी साहब ने आगे फ़रमाया कि जब भी जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तब महिलाओं और अल्पसंख्यकों का मताधिकार समाप्त कर दिया जायेगा, “शरीयत” में उन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। सिर्फ़ मुस्लिम पुरुष की मताधिकार का प्रयोग कर सकते हैं।

जब पत्रकार ज़लील आमिर ने उनसे इस सम्बन्ध में कुर-आन की हदीसों का उदाहरण देने की गुज़ारिश की तो उन्होंने इस सम्बन्ध में कई हदीसों का उदाहरण भी दिया। आमिर ने उनसे अगला सवाल किया कि “फ़िर इस बारे में जमात पूरे पाकिस्तान में कुर-आन की हदीसों को लेकर एक खुला आन्दोलन क्यों नहीं चलाती? इसके जवाब में मौलाना कहते हैं कि चूंकि अभी जमात-ए-इस्लामी अल्पमत में है और इस बात पर कहीं वोट दे रही महिलायें जमात के खिलाफ़ वोट न कर दें इसलिये अभी इसे नहीं उठाया जा रहा, लेकिन “वक्त आने पर” कुर-आन के अनुसार महिलाओं को वोट का अधिकार से वंचित किया जायेगा।

सभी गैर-मुस्लिमों को जज़िया देना होगा

प्रश्न – पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय जज़िया को लेकर आशंकित है, इस बारे में आपके क्या विचार हैं?

उत्तर – हाँ, सभी गैर-मुस्लिमों को जज़िया देना ही चाहिये। जज़िया कोई सुरक्षा धनराशि नहीं है, बल्कि यह सभी गैर-मुस्लिमों पर बन्धनकारक है कि वे जज़िया अदा करें। जब जमात पाकिस्तान में सत्ता में आयेगी तब जज़िया पूरी तरह से लागू किया जायेगा, यदि कोई इस्लाम स्वीकार करना चाहे तभी उसे छूट दी जा सकती है, वरना कोई रियायत नहीं।

सभी भारतीय हिन्दुओं को इस्लाम धर्म स्वीकार करना होगा

प्रश्न - भारत के बारे में आपके क्या विचार हैं?

उत्तर – जमात-ए-इस्लामी पहले से ही भारत को लेकर काम कर रहा है, हमारा लक्ष्य है कि भारत के सभी हिन्दुओं को मुस्लिम बनाया जाये। बाबरी मस्जिद के गिराये जाने के बाद इसकी योजना को और बढ़ाया गया है। पाकिस्तान के पंजाब और सिंध में कई मन्दिर गिराये जा चुके हैं और हमने हिन्दुओं की सम्पत्ति को नष्ट करने का फ़रमान भी जारी किया हुआ है, लेकिन हमारा फ़ोकस मन्दिर ढहाने पर ज्यादा होता है। हमने हाल ही में जारी अपने पेम्फ़लेट में कहा है कि प्रत्येक काफ़िर के पूजास्थल को ढहाने से मुस्लिम अल्लाह के और करीब आ जाता है। इस हेतु हमने सभी पेम्फ़लेट्स पर कुर-आन की हदीसों का भी उल्लेख किया है। जिस प्रकार बाबर ने राम मन्दिर गिराया उसी प्रकार सच्चे मुसलमान को पाकिस्तान में स्थित सभी मन्दिरों को तोड़ देना चाहिये। हमारी योजना है कि भारत के मुसलमानों को भी वहाँ मन्दिर गिराने के लिये कहा जाये, लेकिन “हिन्दू पुलिस” ने भारत के मुसलमानों पर अत्याचार करना शुरु कर दिया।

प्रश्न – यदि सत्ता में आये तो पाकिस्तान में आप किस प्रकार की सरकार की स्थापना करेंगे?

उत्तर – ज़ाहिर है कि यह एक “शरीयत” पर चलने वाली सरकार होगी। संविधान में शरीयत को शामिल किया जायेगा, मदरसों में पढ़े हुए आलिमों को ही हर न्यायालय में काज़ी नियुक्त किया जायेगा, जिनका फ़ैसला अन्तिम होगा।

हमारा उद्देश्य है “सतत जिहाद”

जमात-ए-इस्लामी का मूल उद्देश्य काफ़िरों द्वारा शासित ज़मीन को इस्लाम के झण्डे तले लाना है। काज़ी साहब का दृष्टिकोण है कि कश्मीर से लेकर भारत, श्रीलंका, बर्मा और इधर अफ़गानिस्तान और ताजिकिस्तान तक दारुल-इस्लाम की स्थापना होनी चाहिये। जमात के नेताओं ने बांग्लादेश में यह करने में लगभग सफ़लता हासिल कर ली है।

प्रश्न – लेकिन श्रीलंका और बर्मा तो बौद्ध धर्म वाले देश हैं इनके बारे में आपके क्या विचार हैं?
उत्तर – हाँ हम जानते हैं कि ये दोनों देश बौद्ध हैं लेकिन एक ज़माने में बलूचिस्तान और अफ़गानिस्तान में बड़ी संख्या में बौद्ध रहा करते थे। हम इन दोनों देशों पर इस्लाम लागू करवाने के लिये हर प्रकार का दबाव डालेंगे, लेकिन हमारा पहला लक्ष्य भारत है।

प्रश्न – भारत के सम्बन्ध में आपकी क्या योजनायें हैं? आपकी सारी बातें कश्मीर पर ही क्यों आधारित होती हैं?
उत्तर – देखिये, एक इमारत में नींव होती है और ऊपर मेहराब होती है, जब नींव का पत्थर गिरा दिया जाता है तो मेहराब भी अपने आप गिर जाती है, कश्मीर को हम भारत की नींव मानते हैं, एक बार कश्मीर को भारत से अलग कर दिया जाये तो वह सेकुलर नहीं रह सकेगा। कश्मीर के आज़ाद होते ही हमारा काम आसान हो जायेगा और कश्मीर की तर्ज़ पर नागालैण्ड, आसाम, मिजोरम, झारखण्ड, तमिलनाडु और खालिस्तान को भी अलग होते देर नहीं लगेगी।

भारत को 100% मुस्लिम बनाया जायेगा…

प्रश्न – जैसा कि आप कह रहे हैं, यदि भारत के टुकड़े हो गये तो फ़िर इस प्रकार के कई “हिन्दू” देशों को आप इस्लामिक कैसे बना पायेंगे? वे फ़िर से एकत्रित होकर पाकिस्तान के लिये चुनौती बन सकते हैं।
उत्तर – संगठित और हिन्दू बहुसंख्यक वाला भारत दारुल-इस्लाम की राह में सबसे बड़ी बाधा है, एक बार उसके टुकड़े शुरु हुए तो इस्लामीकरण में आसानी होगी।

प्रश्न – यह तो बहुत विशाल सपना है, 700 वर्ष के मुगल शासनकाल में भी यह सम्भव नहीं हुआ तो अब कैसे होगा?
उत्तर – सही कहा आपने, लेकिन उस वक्त मुस्लिम (मुगल) बादशाहों ने हिन्दुओं को अपने दरबार और कामकाज में अधिकार दे रखे थे। जब एक बार यह तय हो जायेगा कि भारत में सिर्फ़ मुस्लिम ही वोट दे सकेंगे और भारत एक इस्लामिक देश बन गया है, अपने-आप स्थितियाँ बदल जायेंगी, हालांकि इसके लिये भारत के हिन्दुओं और ईसाईयों के दिल में डर पैदा करना ज़रूरी है। मैं आपको एक उदाहरण देता हूँ, आज़ादी से पहले पाकिस्तान के काफ़ी सारे इलाकों में 25% से अधिक हिन्दू बच गये थे, लेकिन आज या तो वे भाग गये हैं या उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया है, यही हमें धीरे-धीरे भारत में भी करना है। आज की तारीख में पाकिस्तान में सिर्फ़ 2% हिन्दू बचे हैं, आखिर यह सब कैसे हुआ? 700 साल के मुगल शासनकाल में जो नहीं हुआ वह हमने 50 साल में ही कर दिया है, हिन्दुओं में हम इतना आतंक पैदा कर देते हैं कि वे डरकर इस्लाम कबूल कर ही लेते हैं। धर्मान्तरण करने का सबसे सही तरीका आतंक ही है। हमने यही तकनीक पंजाब और सिंध में अपनाई है, हिन्दुओं, ईसाईयों और अहमदिया सम्प्रदाय के लोगों को लगातार आतंक में जीने को मजबूर किया और नतीजा आपके सामने है, इंशाअल्लाह हम भारत में भी कामयाब होंगे।

(भाग-2 में जारी रहेगा…)

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