आज _________ को __________ शहर के व्यस्ततम बाजार में कई भीषण बम विस्फ़ोट हुए, जिसमें ____ लोग मारे गये तथा ____ घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। (भाईयों और बहनों अब इन खाली स्थानों में दिनांक / वार, अपने शहर का नाम, मरे हुए लोगों तथा घायलों की संख्या भर लीजिये) इसके बाद के सिलसिलेवार बयान और घटनाक्रम वैसे तो आपको भी मालूम होंगे, फ़िर भी आगे पढ़िये…
(1) प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने इन बम विस्फ़ोटों की कड़े शब्दों में निंदा की है (जितना बड़ा बम उतनी कड़ी निंदा, ठीक है ना!! आगे चलो)
(2) राष्ट्रपति और गृहमंत्री ने आम जनता से शांति बनाये रखने की अपील की है।
(3) नेता प्रतिपक्ष ने इस घटना की भर्त्सना करते हुए कहा है कि ये कायरों का काम है।
(4) देश के प्रमुख शहरों में “रेड अलर्ट” जारी कर दिया गया है, जगह-जगह तलाशी अभियान चलाये जा रहे हैं।
विस्फ़ोटों के आठ-दस घंटे बाद…
(5) गृहमंत्री ने कहा है कि पुलिस के हाथ कुछ महत्वपूर्ण सुराग लगे हैं, और हम जल्दी ही आतंकवादियों को बेनकाब कर देंगे। इन विस्फ़ोटों में पड़ोसी देश का हाथ है (बूढ़ी औरतों की तरह अभी भी सीधे नाम लेने में शरमाते हैं)
(6) तब तक विदेश से भी शोक संदेश आने लगते हैं और फ़िर से हमारे प्रधानमंत्री गरजते हैं, “आतंकवादियों की इस हरकत को कतई बर्दाश्त नहीं किया जायेगा…” या फ़िर, “हम आतंकवाद के सामने घुटने नहीं टेकेंगे…”, या फ़िर “देश की जनता आतंकवाद के खिलाफ़ एकजुट है…” या फ़िर “आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलायेंगे (अफ़जल गुरु और अबू सलेम की तरह)…” या कि “आतंकवादी कहीं भी छुपे हों उन्हें ढूंढ निकाला जायेगा…(जिससे कि बाद में उन्हें छोड़ा जा सके)”, यानी कि ऐसा ही कुछ अनर्गल सा बयान मिलेगा जिसका आज तक कोई मतलब नहीं निकला।
(7) यदि विस्फ़ोट वाले राज्य में कांग्रेस का शासन हो तो भाजपा कहेगी “यह केन्द्र की घोर असफ़लता है और प्रधानमंत्री को इस्तीफ़ा देना चाहिये…” और यदि राज्य में भाजपा की सरकार है तो कांग्रेस कहेगी “कानून व्यवस्था का मामला राज्य सरकार का है, हमारी सूचनाओं का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया गया…”।
(8) सोनिया गाँधी, प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, नेता प्रतिपक्ष के घटनास्थल के दौरे होंगे, फ़ोटो खिंचेंगे, एक और प्रेस विज्ञप्ति होगी और फ़िर इतिश्री… मोमबत्ती वाले का धंधा चमक जायेगा (लेटेस्ट फ़ैशन है, मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि देना)।
पुलिस को भी यह मालूम होता है कि “रेड अलर्ट” दो दिनों तक ही होता है, तीसरे दिन मरने वालों का “उठावना” होते ही फ़िर वही पुराना ढर्रा चालू, और अगले बम विस्फ़ोट का इंतजार… ये सब आपको इसलिये बता दिया कि बम विस्फ़ोट के बाद आपका अखबार पढ़ने में टाइम खराब न हो…
आप लोग तो सुबह घर से निकलो और शाम को सही-सलामत घर पहुँच जाओ तो शुक्र मनाओ कि आज मेरी बारी नहीं आई… लेकिन कल जरूर आयेगी, जब तक भ्रष्टाचार करना नहीं छोड़ोगे और देश से पहले अपनी जेब के बारे में सोचोगे, यदि खुद ऐसा नहीं सोचते तो कम से कम तब तक जब तक कि ऐसा सोचने वालों को नजर-अंदाज करते रहोगे… इसलिये खुद का नाम मृतकों की सूची में देखने से पहले उठो, और देशद्रोहियों, भ्रष्टाचारियों, कालाबाजारियों का गला पकड़ लो…
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